बुधवार, 15 जून 2011

हाल भोजपुरी वेबसाइटन के-1


भोजपुरी में आज ले ओतना वेबसाइट ना बन सकली स जतना एह भासा के बोलेवाला लोग बा। देश में लगभग 6-7 करोड़ लोग भोजपुरी बोले वाला बा लेकिन भोजपुरी साइटन के बात जब होखे त हाल नीमन नइखे। 60-70 गो का छव-सात गो(चर्चा लाएक) वेबसाइट भी भोजपुरी में नइखे। तबहूँ कुछ लोग अइसन बा जे भोजपुरी खातिर आपन तन-मन-धन से लागल बा। ओमें एगो बाड़न अँजोरिया के संचालक-संपादक ओमप्रकाश सिंह जी। आज से आठ बरिस पहिले जब भोजपुरी में वेबसाइट के केहू कल्पना ना कइल तब ईहे आदमी भोजपुरी वेबसाइट, ऊहो हमनी के अपना नागरी लिपि में, शुरु कइल। कहीं-कहीं ईहो सुने के मिल जाला कि भोजपुरी में वेबसाइट अँजोरिया के पहिलहूँ रहे बाकिर एतना त तय बा कि नागरी लिपि में ईहे वेबसाइट सबसे पहिले संसार में आइल।
     भोजपुरी के इतिहास में जब-जब इंटरनेट के बात आई त एके गो नाम पहिले आई आ ऊ एही वेबसाइट के होई। हफ्ता में कम से कम तीन-चार दिन एह वेबसाइट पर कुछ ना कुछ नाया पढ़े के मिलेला। साहित्य, राजनीति, समाज आ फिल्म सब क्षेत्र के बात एपर पढ़े के मिलेला बाकिर अबहूँ कवनो भारी उपलब्धि नइखे हो पाइल। काहे कि एक आदमी अकेले सब कुछ ना कर सके। लेकिन भोजपुरिया लोग जी-जान लगा के साथ देव त ई वेबसाइट आउर बन्हिया बनावल जा सकेला। एह वेबसाइट के एगो बड़हन उपलब्धि ई रहल बा कि एपर शुरु में एगो पत्रिका पढ़े के मिलल आ भोजपुरी के सबसे पहिला इंटरनेट-पत्रिका होखे के गौरव अँजोरिया के मिलल। बाकिर अब ई परम्परा बन्द कके एकर संचालक हमरा समझ से नीमन ना कइलन। आज हिन्दी में हंस, ज्ञानोदय, वागर्थ जइसन हिन्दी के जानल-मानल पत्रिका किताब अइसन बनके हमनी के सामने इंटरनेट पर बा। पी डी एफ़ फाइल में किताब लेखा जब कवनो चीज पाठक के मिलेला त ऊ थाती बन जाला। एहसे ओकर महत्व बढ़ जाला। आशा बा कि संपादक जी ई बात पर ध्यान दीहें। हमरा समझ से शुरु में जवन दम अँजोरिया में रहल बा अब ऊ दम नइखे रह गइल, कम से कम पत्रिका आ सामग्री के मामला में। ई हमार निजी बिचार ह। एहसे केहू के भी मतभेद हो सकेला। 
            भोजपुरी के लेखक लोग जतना मेहनत से लिख रहल बा (अइसन लोग भले कमे काहे ना होखस) आ जवन स्तर रचना में बा तवना स्तर के रचना अँजोरिया पर कमे देखे के मिलेला। शायद एकर कारण भोजपुरी लेखक लोग के इंटरनेट से दूरी बा। शुरु में तS बन्हिया-बन्हिया रचनन के जगे मिलल बा। बाकिर अब ऊ स्तर नइखे लउकत। एह सब के बादो अँजोरिया अँजोर करत रही, ई उम्मेद बा।
      एगो देखे लाएक वेबसाइट बा भोजपुरिया डॉट काम। एह वेबसाइट के एगो कमी ई बा कि एकरा पर हिन्दिओ में खबर दे दे दिआता। एने त एगो सनसनीखेज खबर के एकर संचालक आ सहयोगी लोग जम के छपलख लोग। पिछला 40-50 दिन में एगो खबर के पीछे ई लोग एतना रहल लोग कि लगभग 80 प्रतिशत आलेख आ खबर एके गो बात से जुड़ल रह गइल। एह बारे में ऊ लोग के कहनाम बा कि समय का कमी चलते तनी दिक्कत हो रहल बा। तबहूँ अगर ओ लोग के खबर सही बा त ई लोग धन्यवाद के पात्र बा। काहे कि जम के मेहनत कइल ई लोग एके गो खबर पर। साहित्यिक रचना के अभाव एहू पर बा। कबो-कबो कुछ देखे मिल जाय तS ई संतोषजनक बात नइखे।
      आउरो कवनो वेबसाइट के बारे में अबहीं कुछ कहल नइखीं चाहत। हमरा समझ से ई दूनू के अलावे आउरो गिनहीं लाएक वेबसाइट अइसन होई जवना के उल्लेखनीय मानल जाव।
      बाद में फेन कबो एह बात पर लिखेम बाकिर एगो बात हमेशा मन में आके दुख पहुँचावत रहेला कि मैथिली(जवना के बोलेवालन के संख्या भोजपुरी का अधो नइखे) के कुछ वेबसाइट केतना आच्छा से आगे बढ़ रहल बा। एकरा सबूत खातिर एके गो वेबसाइट काफी बा जवना के नाम हS  विदेह। एह वेबसाइट पर हर पन्दरे दिन पर एगो पत्रिका निकलता। ई पाक्षिक पत्रिका आज से ना पिछिला दू-तीन साल से लगातार ऊहो सै पृष्ठ से जादे के निकल रहल बा। इंटरनेट पर कवनो पत्रिका आपन पचास गो अंक बिना कवनो बाधा के निकलल एगो बड़ उपलब्धि बा। बाकिर भोजपुरी में कुच कमी बा तS एकरा पीछे भोजपुरिया लोग के दोष बा। मैथिली बोलेवाला लोग मैथिली  के जवन आदर देला तवन भोजपुरिया लोग ना देवे।

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