मंगलवार, 7 जून 2011

मुँहचोर लोग आ बाबा रामदेव के अनशन

बाबा रामदेव के अनशन के सरकारी गुंडन के दम पर दबा देवल गइल बा। ई कवनो हिसाब से ठीक नइखे। एहपर एक से एक नेता आपन आपन घटिया बयान दे रहल बा लोग। बाबा के दिल्ली में पन्दरे दिन तक घुसे के भी मनाही हो गइल बा। सरकार आ मस्तिष्क विहीन पुलिस अपना के शेर बुझता बाकिर एकर फल तनिको आच्छा ना होई।


एगो कपिल सिब्बल बाड़न जिनकरा काल्ह तक बाबा के साथे बात करे में कवनो दिक्कत ना भइल लेकिन जवन काम ई कइले बाड़न ओकर बदला इनका कहीं-ना-कहीं त चुकावहीं के पड़ी। बाबा के आन्दोलन से खिसिया के ई कहले बाड़न कि- योग के आसन सिखावे वाला राजनीतिक आसन मत सिखावल करे। लेकिन ई सलाह देवे के पहिले ई ना सोचलन कि राजनीति में जे भी जाला चाहे जा सकता ओकरा खातिर कवनो योग्यता तय नइखे त ई कहे के अधिकार इनका कहाँ बा कि के राजनीतिक बात करी आ के ना करी। अपना बयान में ई आदमी कहले बा कि ई सब बात लाजमी रहे। लेकिन हमार सवाल बा कि जब विधानसभा चुनाव के प्रचार में लोगन के संख्या पाँच हजार बहुत आसानी से पहुँच जाला तब बाबा अतना लोकप्रिय आदमी के आन्दोलन में कइसे पाँचे हजार आदमी आई? ई सोचले बिना कवनो आग्या सरकार चाहे पुलिस कइसे दे सकेले। ई साबित करता कि कपिल सिब्बल आ पुलिस दूनो के दिमाग में तनिको ईमानदारी नइखे चाहे ई दूनू के दूनू एकदम तानाशाही आ भ्रस्टाचार के समर्थक बा।

अइसहीं एगो नेता दिग्विजय सिंह के त आदत हो चुकल बा कि बाबा के उपर जब ले ऊ कुछ कह ना लेस उनका नीन ना आ सके। इनका एतना तमीज तक नइखे कि कवनो आदमी के का आ कइसे कुछो कहल जाला। बाबा खातिर जवन शब्द ई बोलले बाड़न, ऊ त उनकर इच्छा बा। लेकिन जवन तरह से बोलले बाड़न ओमें कहीं से सभ्यता नइखे। ई बदतमीज केतना ईमानदार आ महान बाड़न ई सभे जानता।

अब अन्ना के भी कपिल सिब्बल सिखावे खातिर आपन बयान दे चुकल बाड़ें। कहीं कहीं सुने के मिलल कि बातचीत खातिर बाबा के जवन सम्मान सरकार के तरफ से मिलल ऊ केतना कांग्रेसी नेता लोग के ना पचल लेकिन हम पूछSतानी कि जवन मनमोहन सिंह इंग्लैंड जाके रानी के सामने माथा नवा के डिग्री लेके आ सकेले उनका सरकार में तनि सम्मान गलती से बाबा के मिल गइल चाहे बाबा के बाजार गरम रहला से देवे के पड़ल त कवन पहाड़ गिर गइल।

एने भाजपा आपन चाल चले में लाग गइल बा। आडवाणी के मांग बा कि सरकार अपना भारी अत्याचार कइला खातिर माफी मांगो। सुनले बानी कि कुछ दिन पहिले सोनिया के चिट्ठी लिख के ई आडवाणी नाम के आदमी खुदे कवनो बात पर माफी मांग चुकल बा। लेकिन का खाली माफी के दू गो शब्द कहला से अत्याचार खतम हो जाई। ई घटिया मांग के जगे ईहो मांग कइल जा सकता कि सरकार इस्तीफा देव। माफी मांगे के सड़ल-गलल परम्परा के पोषक भाजपाई लोग आपन समय में सब कुछ भुला के गीत गावत रहे लोग आ अब मौका देखतहिं कूद कूद के हल्ला शुरु क देले बा लोग।

भारत में सबसे मुँहचोर राष्ट्रपति, राहुल गाँधी आ मनमोहन सिंह बा लोग। राहुल नौटंकी आ फिल्मी अन्दाज में किसान खातिर हल्ला क लेलें बकिर जब पचास हजार लोग पर अत्याचार भइल त मुँह लुका के कोन्हरी में बइठल बाड़न। मनमोहन काल्ह एगो पत्रकार के सवाल के जवाब देत कहले बाड़न कि जवन भइल तवन ठीक ना भइल बाकिर दोसर कवनो उपाय ना रहे। का भइल मनमोहन के बुद्धि कहाँ गाएब हो गइल। अपना के बड़ा बिदवान आ ईमानदार कहे खातिर मुँह बा इनका। कहाँ रहलन ई जब राज ठाकरे बिहारी आ उत्तर प्रदेश के लोग के मार मार के भगावत रहे। ई हिंजड़ा, नपुंसक सरकार आ लोग से कवनो उम्मीद कइल बेकार बा। भारत के राष्ट्रपति के कवनो बयान अभी ले सुने के ना मिलल ह। जब राष्ट्रपति सोनिया के चमचा आ दाई बाड़ी तब ई उम्मीदो बेकारे बा। एगो परम्परा बन गइल बा कि जब कुछो होखे त 'उचित कार्रवाई कइल जाई आ सरकार बिचार करतिया' के मंत्र जाप दिहल जाला।

ईहाँ ई बिचार नइखे करेके कि बाबा के अनशन गलत बा कि सही। कुछ सरकारी चमचा जेकरा दिमाग में अंग्रेजी भूत रहेले सन हल्ला करSता लोग कि सरकार के अवहेलना बाबा कर रहल बाड़ें लेकिन ई कवन सरकार आ कानून ह जवन मौलिक अधिकार पर भी आपन टांग अड़ाई। काला धन के लेके गम्भीर भइल एकदम जरूरी बा कि काहे कि अगर अइसन भइल कि सब चोरवा बिदेश भाग जा सन आ आपन पइसा निकाल के ऐश कर सन त भारत के लोग का करी। केतना देश से झगड़ा करी आ आपन हिस्सा मांगी?

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