शनिवार, 24 अगस्त 2013

भकोलवा हीरो हो गइल (भोजपुरी एकांकी)



 (पहिलका दृस्य)
  



(आपिस में बी० ओ० बइठल बा। टेबुल-कुर्सी लागल बा। हेडमास्टर दुआरी पर आवऽता।)

हेडमास्टर (हान जोर के) - परनाम बी० ओ० साहेब!
बी० ओ० - आईं-आईं। पनाम-परनाम! कहीं। सब ठीक बा नू?
हेडमास्टर - रउरा किरपा से आ भगवान के दया से सब ठीक बा।
बी० ओ० - तब! कइसे-कइसे एने चलल बानी?
हेडमास्टर लीं! रउरा त इयादे नइखे! आज पनरे तारीख नू ह! राउर सेवा करे आइल बानी।
बी० ओ० - हँ जी, हमरा त धेयाने ना रलऽ।
हेडमास्टर - ए महीना में बीस हजार बचवले बानी रउआ खातिर!
बी० ओ० - धीरहीं-धीरहीं बोलीं। डेरा पर नू आवे के चाहत रलऽ। (हेडमास्टर पइसा निकालऽता। बी० ओ० हाथ आगे बढ़ा के) चलीं, जब आइए गइल बानी त देइए दीं। ई बी० ओ० झीटू तिवारी आइल लछमी के जाए ना देस।
हेडमास्टर - हँ-हँ, जरूर! आपन हिस्सा लेइए लीं त ठीक रही। ना त हमरा भारी होखे लागी। (देते में कहऽतारें तब बी० ओ० पइसा ले के कहऽता- जय लछमी जी, जय लछमी जी। हेडमास्टर खड़ा होके) अब चलऽतानी। कवनो बात होई त राउर नंबर बड़ले बा, बतिआ लिहल जाई।
बी० ओ० - हँ, ठीक बा। बाकिर धेयान रहे ऊ नंबर चोरउका नंबर ह। खाली हमनिए लेखा आदमी जानेला। सरकार आ जनता नाहिए जाने। एसे तनी बचाइए के ओपर फोन धराएम।
हेडमास्टर - हँ हजूर। एकदम धेयान रही। परनाम!


(दोसरका दृस्य)

(इस्कूल के एगो मास्टर लुटेरा सिंह हड़बड़ाइले दउड़ के हेडमास्टर से)
लुटेरा सिंह बालेसर भाई, ए बालेसर बाई! उठऽ हाली। ईहाँ त झमेला होखे आला लागऽता।
हेडमास्टर (धरफराइले) का भइल! का हल्ला कइले बाड़ऽ! हेतना मक्खन-मलाई, पूरी-दही खइला के बाद तनी सुस्ताइलो मुस्किल क देलऽ!
लुटेरा सिंह का भइल पूछऽ तारऽ! 40 गो लइका खाना खाके ओका देलन सन! अब तूँ त जइबे करबऽ, हमरो के ले जइबऽ। दू लाख दे के मास्टर भइल बानी, ई सब लोग जानऽता।
हेडमास्टर (एके बेर खड़ा होके। आ पसेने-पसेने हो जातारें) - साँचो! ई डोम-चमार के लइका ओका सन चाहे मरऽ सन, आपन नू जान बचावल जरूरी बा! चलऽ भागऽ अबहीं ना त गाँववाला कूँच दिहें सन।
(धोती धइले धउड़ के भागऽतारें। हेडमास्टर के भगला के बाद लुटेरा सिंह सोंचऽता।)
लुटेरा सिंह अपने महीना में 50 हजार मार लिहें आ हमरा के दू हजार दे के कहिहें कि चुप रहऽ, फेर मिली। लइका सन के खाना अलगे आ आपन खाना अलगे बनवइहें।
(तब तक इस्कूल के एगो लइका आवऽता।)
लइका सर जी, सर जी! सोनुआ के त साँसे नइखे चलत!
लुटेरा सिंह बाप रे बाप! मसरख वाला बतिया एहूजा होई का रे? (सोंचते में) ए लुटेरा सिंह, भागऽ ईहाँ से ना त जान ना बाची।

(तिसरका दृस्य)

(गाँव में 40 गो लइका इस्कूल के खाना खाके मर गइलन सन। गाँव में समझावे-बुझावे खातिर एगो बाबा स्री स्री 1008 आनंदी बाबा लोग के सामने बाड़न।)

बाबाजी देखीं लोग, साधू-सन्यासी के त कामे ह रउरा लोगन के कल्यान। सब भगवान के लीला बा। एकर त दुख सभे के बा कि 40 गो लइका मर गइलें सन। बाकिर सब पिछिलका जनम के नू फल होला! सब भगवान के लीला बाऽ। सीताराम! सीताराम! देखीं सब त भगवाने करेलन। चोर-सिपाही सब ऊहे हउवें, भगवान कहऽतारें-

हमही पुलिस के भेस में, हमही बानी चोर ।
हमही आदम-भेस में, हमही आदमखोर ॥

सियावर राम चंद्र की जय! आच्छा चाहे खराब सब भगवाने करेलन। सब अपना-अपना करम के फल बा। देखीं, भगवान कहऽतारें-

जग में सब कुछ हम करीं, आच्छा आउर खराब ।
केहू खाला माँग के, केहू बनल नवाब ॥

सियावर रामचंद्र की जय! (गाँव के एक-दू आदमी जय-जयकार करऽता।) जवन-जवन लइका मरल बा, ओकर कारन ओकरे पिछिलका जनम के करनी बा। जिअन-मरन सब उनके (हाथ ऊपर क के) हाथ में बा। सीताराम! सीताराम! तुलसी बाबा रामाएन में कहले बानी-

हानि लाभ जीवन मरन जस अपजस बिधि हाथ ।

(राहुल नाँव के एगो गाँव के लइका खड़ा होता।)

राहुल ए बाबा! हमनी का हाथ में कुछो नइखे! (खिसिआइले) तुलसी बाबा ना अइहें लइका सन के जिआवे। अपने त मलाई-दूध आ फल खा-खा के कार आ हवाई जहाज से घूमऽतानी। (तोन का ओर इसारा करत) तोन अतना निकल गइल बा कि चल नइखे होत। सुनीं-

खून गरीब के चूस के, फेंकले बानी तोन ।
बाटे सब रउआ लगे, गाड़ी बंगला फोन ॥

भकोलवा बाह-बाह! राहुल भाई! बाह!
राहुल अब आगे सुनीं-

लइका मरे गरीब के, एह दुनिया में रोज ।
कवनो साधू ना करे, ओ लइकन के खोज ॥

(बाबा डेरा जाताऽरें, झेंपऽतारें आ लोग से कहऽतारें।)
बाबाजी देखीं लोग, पापी का साथे ना रहे के। सीताराम! सीताराम! ई नएका छोंकरा पाप से भर गइल बा। एकरा पर त कलजुग सवार हो गइल बा। (खिसिआ गउल बारें।)
भकोलवा हँ-हँ। ए आनंदी बाबा! राउर नाँव आनंदी नू ह। माल दाब-दाब के आनंद करीं।
बाबाजी सीताराम, सीताराम! हम अब ईहाँ एक छन ना रह सकेनी। सीताराम- सीताराम!
भकोलवा हँ, हँ। जाईं-जाईं जी, ए गोसाईं जी।

(बाबा के गइला पर से एगो नेता धनीराम आवऽतारें। पीछा से धनीराम जी जिंदाबाद, धनीराम जी जिंदाबाद के नारा।)

नेताजी ए गाँव के घटना सुन के हमरा से रहल ना गइल ह। सब बात के जाँच जरूर होई। चाहे केहू होखो, ओकरा के छोड़ल ना जाई। बी० ओ० से ले के इस्कूल के मास्टर तक, सब जाना जाँच में धरा जइहें। ई रउरा लोग से हमारा वादा बा। (एगो लइका से) ए बुओ, इस्कूल के मास्टर आ हेडमास्टर के नाँव बता द। हम ओकनी के ना छोड़ेम।

(लइका बोलऽता।)
लइका हेडमास्टर के नाँव ह बालेसर सिंह। आ एगो त मास्टरे बाड़े, नाम ह लुटेरा सिंह।
गाँव के आदमी लुटेरा सिंह! ई मास्टर ह कि डकइत?
भकोलवा डकइते बूझऽ लोग। सब साइकिल-मोटरसाइकिल छीने वाला मास्टर हो गइल बाड़े सन।
नेताजी ठीक बा। (हाथ जोर के) अब चलऽतानी। रउरा लोग घबराईं मत। दोसी के सजाय जरूर होई।

(नेताजी चल जातारें। कोना में राहुल आ भकोलवा के बातचीत।)
भकोलवा राहुल भाई, ई नेतवा कहऽता कि जाँच कराई। ई का जाँच करवाई हो? हमनी के कुछ करे के चाहऽता।
राहुल तूँ सही कहऽ तारऽ। पुलिस पइसा खा जाई आ कुछुओ कह दिही। बी० ओ० आ हेडमास्टर सब एने-ओने क दिहें सन। हमनी के चुपचाप एकर जसूसी करे के। हमनी के चुप ना रहे के चाहीं। एकनिए के चलते हतना लइका मर गइलें सन। एकनी के छोड़े के नइखे।
भकोलवा ­ एकदम राहुल भाई!

बाकी... 
अंतिम भाग





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