शनिवार, 27 अगस्त 2011

जन लोकपाल बिल एगो तमाशा त ना ह?


जन लोकपाल बिल का ह? एगो अइसन झुनझुना जवना से लोग हमेसा भुलाइल रहो। सरकार के नीति हमेसा एके साथे दूनो ओरी चले वाला लेखा होला। कुछ ओइसने नीति अन्ना के जन लोकपाल बिलो में बा।

ई बात एगो उदाहरन से साफ हो जाई।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

तेली क नाटा आ झाँसा-पट्टी (लघुकथा)- बिगुल-1

केवनो गाँव में एगो तेली रहे। ऊ अपनी नाटा के अन्हवट के कोल्हू में नधल रहे…

रविवार, 24 जुलाई 2011

कविता पर अन्तरिक्ष के प्रभाव(लघुकथा)- बिगुल-1

बिगुल आज से शुरु कर रहल बानी। अबहीं सम्पादकीय नइखीं दे पावत एकर दुख बा बाकिर जल्दिए ऊहो दे देब काहे कि तनि दिक्कत बा ओमें। ओइसे पत्रिका में पहिलही दिहल गइल बा। कहीं-कहीं पढ़े में दिक्कत हो सकेला बाकिर पढ़ा जाई। त पहिले ओ अंक के आवरण पृष्ठ देखीं फेर पहिलका लघुकथा पढ़ीं।

शनिवार, 23 जुलाई 2011

एगो प्रयास

बहुत जादे दिन भइल लिखला। हिन्दी में त नियमित लिखात रहेला बाकिर भोजपुरी में ना। ईहे वजह बा कि हमेसा देर हो जाता। बाकिर कुछ दिन का बाद सब ठीक हो जाई आ नियमित लिखे लागेम। अभी कुछ दिन पहिले अँजोरिया पर भोजपुरी जिन्दगी पत्रिका के नाया अंक आ आइल बा। ओकरो के पढ़ के आपन बात कहल जरूरी बा। ऊहो बाकिए बा। 

शनिवार, 9 जुलाई 2011

आम आदमी(गजल)


आखिर के बाS इहाँ आम आदमी।
रोज पूछेला ई सुबह शाम आदमी।

आम सय में आ ई चार आना में
बजारे बिकाता सरेआम आदमी।

कुत्तो आदमी कह के गारी देता
खूबे कमइले बाS नाम आदमी।

रविवार, 19 जून 2011

वर्णमाला के गीत (बालगीत)


क से 'कउआ' ख से 'खाना'
ग से बबुआ गइह 'गाना'

घ से 'घोरा' च से 'चप्पल'
छ से 'छाता' ज से 'जंगल'

शनिवार, 18 जून 2011

तू पूछबS कि हम के हईं (लघुकथा)

पान सौ साल पहिले के बात ह। दुआरी पर एगो राही आइल आ केंवारी बजवालस। घर में से हम निकलनी आ पूछनी कि का बात ह? राही कहलस कि तनिसा जगे चाहीं रहे खातिर। हम अपना खाली जमीन में से तनी सा दे देहनी। पूरा धरती आपने नू ह।

बुधवार, 15 जून 2011

हाल भोजपुरी वेबसाइटन के-1


भोजपुरी में आज ले ओतना वेबसाइट ना बन सकली स जतना एह भासा के बोलेवाला लोग बा। देश में लगभग 6-7 करोड़ लोग भोजपुरी बोले वाला बा लेकिन भोजपुरी साइटन के बात जब होखे त हाल नीमन नइखे। 60-70 गो का छव-सात गो(चर्चा लाएक) वेबसाइट भी भोजपुरी में नइखे। तबहूँ कुछ लोग अइसन बा जे भोजपुरी खातिर आपन तन-मन-धन से लागल बा। ओमें एगो बाड़न अँजोरिया के संचालक-संपादक ओमप्रकाश सिंह जी। आज से आठ बरिस पहिले जब भोजपुरी में वेबसाइट के केहू कल्पना ना कइल तब ईहे आदमी भोजपुरी वेबसाइट, ऊहो हमनी के अपना नागरी लिपि में, शुरु कइल। कहीं-कहीं ईहो सुने के मिल जाला कि भोजपुरी में वेबसाइट अँजोरिया के पहिलहूँ रहे बाकिर एतना त तय बा कि नागरी लिपि में ईहे वेबसाइट सबसे पहिले संसार में आइल।

गुरुवार, 9 जून 2011

मंत्रीजी के फरमाइस(हास्य कविता)


शैम्पेन चाहीं टैंकर के टैंकर
ना चाहीं पंखा ना चाहीं कूलर
मंत्रीजी के अपना एसी चाहीं ।

जब बँटाये देस के दौलत
जइहें ऊहवां धउड़त-धउड़त
थोरका ना इनका बेसी चाहीं ।
ना चाहीं पंखा ना चाहीं कूलर
मंत्रीजी के अपना एसी चाहीं ।

मंगलवार, 7 जून 2011

मुँहचोर लोग आ बाबा रामदेव के अनशन

बाबा रामदेव के अनशन के सरकारी गुंडन के दम पर दबा देवल गइल बा। ई कवनो हिसाब से ठीक नइखे। एहपर एक से एक नेता आपन आपन घटिया बयान दे रहल बा लोग। बाबा के दिल्ली में पन्दरे दिन तक घुसे के भी मनाही हो गइल बा। सरकार आ मस्तिष्क विहीन पुलिस अपना के शेर बुझता बाकिर एकर फल तनिको आच्छा ना होई।