शनिवार, 27 अगस्त 2011

जन लोकपाल बिल एगो तमाशा त ना ह?


जन लोकपाल बिल का ह? एगो अइसन झुनझुना जवना से लोग हमेसा भुलाइल रहो। सरकार के नीति हमेसा एके साथे दूनो ओरी चले वाला लेखा होला। कुछ ओइसने नीति अन्ना के जन लोकपाल बिलो में बा।

ई बात एगो उदाहरन से साफ हो जाई।

हर जिला में परीक्षा होला। कबो मैट्रिक के, कबो इंटर के त कबो कुछुओ के। प्रशासन आ सरकार के नीति बा कि परीक्षा में चोरी चाहे कवनो आउर गड़बड़ी ना होखे। कम से कम कहल त ईहे जाला। आ एह नीति के अनुसार अफ़सर लोग खूब हीरो बनेला लोग। आ स्कूले-स्कूले आ परीक्षा के केंद्रे-केंद्रे घूम के परीक्षार्थियन के निष्कासित करत फिरे ला लोग। माने चोरी होई आ पकड़इला पर दंडो दिआई बाकिर अइसन कवनो तरीका ना अपनावल जाई जवना से चोरी के नौबत मत आवे। काहे कि हीरो बने के ओतना के मौका ना मिली। माने समस्या का जड़ में कबो ना जाइल जाई बाकिर तना में काट-छाँट होई।

बस कुछ अइसने नियम-कानून बा अन्ना के बिल में। भ्रष्टाचारी महात्मा लोग के आपन काम क लेला पर से जाँच पड़ताल त होई बाकिर अइसन कवनो बेवस्था ना होई जवना से अइसन महात्मा लोग के मौके मत मिलो। ई जोर जवन जनता के लउकता, एकर एगो बड़ कारन बा कुछ चोर किस्म के अइसने लोग के भारी मदद। अब केहू सोचे कि जवन नियम भ्रष्टाचार के गाछ के तना में काट-छाँट करे खातिर बा, का ऊ अइसन ना हो सकत रहे कि भ्रष्टाचार होखबे मत करे। बाकिर अइसन काहे के होखो। जे हल्ला करता ओकरा भ्रष्टाचार खतम करहीं के नइखे।

मतलब ई कि पहिले खाद-पानी दे के भ्रष्टाचार के गाछ के छोट से खूब बढ़ाव आ फेर नौटंकी देखाव कि कइसे हम एकरा के ठीक करतानी।

आ सरकारो कम नइखो। जब आज ना काल्ह ओकरा ई कानून बनावहीं के बा त ऊ पहिलहीं मान लीहित तब देस में जवन करोरों-अरबों रोपेया के भारी नुकसान होता ऊ  ना होइत।

बरबादी ए देस में, होता लाख-करोर।
जनता भुलियाइल रहल, खुश बाड़े सन चोर॥

अन्ना के कारन भइल, कतना धन बरबाद।
एकर का खाता-बही, सब रखी के इयाद॥

(बिगुल पर अबहीं काम नइखे हो पावत एह से ऊ आगे नइखीं दे पावत।)

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