रविवार, 11 सितंबर 2011

तकनीकी छेत्र में सुतल बा भोजपुरिया लोग


भोजपुरी में कम्प्यूटर छेत्र में कवनो काम अबहीं ले ना हो सकल। एको गो साफ्टवेयर ना बन सकल। ना एको शब्दकोश, ना ब्राउजर, ना कुछुओ। एकरा खातिर भोजपुरिया लोग में पता ना कवनो रुचि बा कि ना? कुछ वेबसाइटन आ ब्लाग माने चिट्ठा के अलावा कुछुओ कहे लाएक काम अबहीं ले ना हो सकल। भोजपुरी अकादमी आ भोजपुरी से जुड़ल कवनो संगठन के ए सब में कवनो रुचि बा कि ना, ईहो साफ नइखे। ई सबसे चिन्तित होके आज एगो फ्यूल चाहे फ्यूअल नाम के एगो परियोजना से हम जुड़नी ह। अब आर्थिक सहायता आ मन होखला पर ई बा कि के आगे आई आ अपना भाषा में ए छेत्र में कुछ करे के चाही। हमरा समझ से भोजपुरी के कुछ समस्या एकरा मानकीकरण में आवेला। हम हिन्दी में राजेश जी ( ईहें के फ्यूल के कर्ता-धर्ता बानी) के जवन मेल कइले रहनी, ओकरे में से कुछ ईहाँ रख रहल बानी।

एक और समस्या है कि सारण जिले में ड़ का नहीं का उच्चारण किया जाता है जबकि सीवान-गोपालगंज-आरा-बलिया आदि में ड़ का। ऐसा ही हाल का है। भोजपुरी में को मानना मेरे लिए आसान नहीं होता। हमारे छपरा के इलाके में साधारन कहा जाता है न कि साधारण। इसका आधार मुझे लगता है कि क्षेत्रीय बोलियों और भाषाओं में , ‘ आदि का प्रयोग न हो, यही रहा होगा। ऐसे ही सारण में लिंग का ध्यान भी बहुत कम रखा जाता है। जैसे - ट्रेन आवता। गारी आवता। जबकि बलिया और अन्य इलाके में- गाड़ी आवतिया। यानि लिंग की तरफ़ भी हमारे यहाँ कम ध्यान दिया जाता है। तो क्या हम लिंग-- आदि पर आरा-भोजपुर के इलाके के व्याकरण और शब्द को स्वीकार कर चलें?
आ एगो आउर मेल में अफ़सोस है कि भोजपुरी का कोई कोश उपलब्ध भी नहीं है जो ठीक ठाक हो। वैसे भोजपुरी के पहले ठेठ व्याकरण और एक
और भोजपुरी व्याकरण की एक प्रति है मेरे पास, जिसे भोजपुरी अकादमी ने
छापा है। भाषा का जो आग्रह मैथिली लोगों में हैं (कम से कम बिहार में), वह भोजपुरी में देखने को नहीं मिलता। कुछ महीने पहले भोजपुरी-हिन्दी-अंग्रेजी का एक कोश बनाना शुरु किया था। देखिए अपनी आलसी होने की आदत से मुक्त हुआ तो, उसपर काम हो सकेगा। फिर भी भोजपुरी की मुख्य साइट अँजोरिया पर शब्द हैं थोड़े। एक और सरकारी साइट पर भी एक छोटा कोश है भोजपुरी का। सबको देखते हुए सोचता हूँ। अब समस्या है कि कई शब्दों का उचित अनुवाद पता नहीं हो पाएगा या नहीं।
माने चिन्ता के बात ई बा कि बहुत काम करे के पड़ी भोजपुरी खातिर। बाकिर केहू के झंडा घुमावला से छुट्टी होखो तब नू।
अब अन्त में कुछ काम, जवन होखो, ई इक्छा बा।
1) भोजपुरी फ्यूअल बिकसित कइल जाव।
2) भोजपुरी में एगो शब्दकोश के साफ्टवेअर बने।
3) भोजपुरी में शब्दकोश बने।
4) भोजपुरी में संचालन तंत्र माने आपरेटिंग सिस्टम बने।
5) भोजपुरी तकनीकी रूप से समृद्ध बने आदि आदि।

बाकिर केहू अबहीं ले साथ देवे आला ना मिलल। राजेश जी के चलते कुछ काम हो सकेला। अब ई सब काम अकेले कइसे होई? तबहूँ हम शब्दकोश के साफ्टवेअर बनावे के जिम्मा ले लेब बाकिर आउर सब काम में केहू के सहयोग चाहीं। आर्थिक सहयोग आ समय के सहयोग, जब ले दूनू ना मिलि तब ले त ई सब सपने बा।

4 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह भाई!
    दिल खुस कै दिहेउ।
    हमार मादरी जुबान अवधी हुवै, मुल हम भोजपुरी ठीक ठीक पढ़ि के समझ लेइत है।
    भोजपुरी का तकनीकी से जोडै के लिये तोहार चिन्ता हमरे मन मा एक वारी उत्साह भरिस दुसरे वारी सोचौबो किहिस।
    ब्लाग-जगत मा आप की तरह कर्मठी लरिका हैं, यहि बात से हमार बाछैं खिलि गईं :)
    .
    हम लोकभासन कै कट्टर समर्थक होई! यहि लिये हम आपके उद्यम का भूरि भूरि सराहुब, ई काम धारा के बिपरीत नाव खेवै कै है, ई चुनौती बड़ेन से निभि सकत है, ब्लागबुड के आत्ममुग्धन से नाहीं।
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    आप भोजपुरिया माटी कै सपूत हुवैं, आपकी प्रतिभा का हमार नमन!

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  2. आपके ब्लोग कै जानकारी हम कुछ लोगन तक पहुँचावै कै परयास करत अहन, ऊपर वाला कमेंट हमरै कीन आय।

    ~ अमरेन्द्र अवधिया

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  3. देवनागरी में भोजपुरी लिखे खातिर मदद!
    भोजपुरी भाषा
    भोजपुरी
    बोलल जायेला : भारत, नेपाल, माँरिशस, नेदरलैंड्स, फिजी, गुयाना, सेंट विसेंट आ ग्रेनाडिंस, बार्बाडस, त्रिनिदाद आ टोबैगो, सिंगापुर, संयुक्तराज, ब्रिटेन, रियूनियन, सूरीनाम
    क्षेत्र : नेपाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, आसाम, दिल्ली, पश्चिम बंगाल
    बोले वालन के संख्या : 26.6 करोड़
    भाषा परिवार 1. इंडो यूरोपियन

    2. इंडो आर्यन 3. पूर्वी समूह 4. इंडो ईरानी 5. बिहारी 6. भोजपुरी
    लिपी : देवनागरी, कैथी
    भाषा कोड : ISO 639 - 1 bh

    ISO 639 - 2 bho ISO 639 - 3 bho

    भोजपुरी एगो क्षेत्रीय भाषा ह बाकी ई भाषा के बोले वालन के संख्या एगो राष्ट्रीय स्तर के भाषा के बराबर बा। ई भाषा भारत के उत्तर के मध्य तथा पुरब मेँ बोलल जायेला। ई भाषा नेपाल के एगो राष्ट्र भाषा बा।[१] ई भाषा बिहार के पश्चिमी भाग, झारखण्ड के उत्तर-पश्चिम आ उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र मेँ बोलल जायेला। एतना ही ना ई भाषा नेपाल देश के तराई क्षेत्र [२] आ गुयाना देश, सुरीनाम देश, फिजी देश, त्रिनिदाद आ टोबैगो आ मौरिशस तक में बोलल जायेला।

    भोजपुरी भाषा पूर्वी हिन्दी या बंगाली सातत्य के भाषा ह जौन कभी आसाम आ बंगाल से लेके बनारस ले बोलल जात रहल। जबकी बाँकी बिहार आ यूपी के क्षेत्र के लोग धीरे धीरे ई हिन्दी आधारित भाषा के अपना लेईलस, पटना आ बनारस के बीच के क्षेत्र मेँ ई भाषा आपन पकड़ बहुत मजबुती से बना लेईलस।

    भारत सरकार जब जनगणना करावत रहल, तब भोजपुरी के एगो भाषा के दर्जा देवे से मना कर दिहल आ कह देलख कि भोजपुरी हिन्दी के एगो बोली ह लेकिन अब भारत सरकार भोजपुरी के राष्ट्रिय स्तर के भाषा के दर्जा देवे खातिर तैयारी कर रहल बिया जबकि ई भाषा के नेपाल सरकार राष्ट्रिय स्तर के भाषा घोषित कर चुकल बिया।

    भोजपुरी के शब्दावली संस्कृत, हिन्दी, उर्दू आ उत्तर भारत के अन्य हिन्द-आर्यन भाषा से मेल खायेला। भोजपुरी आ अन्य भाषा साथ में मैथिली के प्रसिद्ध लोकगीत गायक राजेन्द्र प्रसाद, मनोज वाजपेयी, आ former भारत के मुख्यमंत्री लालबहादूर शास्त्री, चन्द्र शेखर। बिहार कोकिला पद्मा श्री शारदा सिन्हा आदी बानी लोग।

    भोजपुरी के कईयौं बोली, तीन चाहे चार गो बोली अकेले पूर्वी उत्तर प्रदेश में बोलल जायेला।

    विद्वान, बहु गणितज्ञ आ बहुभाषाविद् महापंडित राहुल संस्कृतयायन भोजपुरी में कुछ लिखे के काम कईले रहनी। [३] कुछ अन्य प्रख्यात लेखक जैसे विवेकी राय। कुछ अन्य लेखक बानी लोग जे भोजपुरी में लिखले बानी पर बहुत कम मात्रा में। कुछ अन्य ध्यान में रखे वाला लोग बानी प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी स्वामी सहजानन्द सरस्वति, मगही भाषा के प्रथम राष्ट्रपति। मगही भाषा भी बिहारी भाषा मानल जायेला। ई भाषा हिंद-आर्यन भाषा के पुर्वी अंचल समूह के अंग ह जेमे बंगाली भाषा आ उड़िया भाषा के मिश्रण बा।

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  4. सचमुच लिखले बानी भाई जी , भोजपुरी खातिर हम सबके मिल के कोशिश करें के चाहीं । जतना मदद होई , जईसे होई , हम करे खातिर तईयार बानी । एक बार हमरे पोस्ट पर आके देखीं कि हम आपके काम आ सकीला कि ना । नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ -प्रेम सागर सिंह ।

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ईहाँ रउआ आपन बात कह सकीले।