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शनिवार, 6 अगस्त 2011

तेली क नाटा आ झाँसा-पट्टी (लघुकथा)- बिगुल-1

केवनो गाँव में एगो तेली रहे। ऊ अपनी नाटा के अन्हवट के कोल्हू में नधल रहे…

रविवार, 24 जुलाई 2011

कविता पर अन्तरिक्ष के प्रभाव(लघुकथा)- बिगुल-1

बिगुल आज से शुरु कर रहल बानी। अबहीं सम्पादकीय नइखीं दे पावत एकर दुख बा बाकिर जल्दिए ऊहो दे देब काहे कि तनि दिक्कत बा ओमें। ओइसे पत्रिका में पहिलही दिहल गइल बा। कहीं-कहीं पढ़े में दिक्कत हो सकेला बाकिर पढ़ा जाई। त पहिले ओ अंक के आवरण पृष्ठ देखीं फेर पहिलका लघुकथा पढ़ीं।