भोजपुरी में कम्प्यूटर छेत्र में कवनो काम अबहीं ले ना हो सकल। एको गो साफ्टवेयर ना बन सकल। ना एको शब्दकोश, ना ब्राउजर, ना कुछुओ। एकरा खातिर भोजपुरिया लोग में पता ना कवनो रुचि बा कि ना? कुछ वेबसाइटन आ ब्लाग माने चिट्ठा के अलावा कुछुओ कहे लाएक काम अबहीं ले ना हो सकल। भोजपुरी अकादमी आ भोजपुरी से जुड़ल कवनो संगठन के ए सब में कवनो रुचि बा कि ना, ईहो साफ नइखे। ई सबसे चिन्तित होके आज एगो फ्यूल चाहे फ्यूअल नाम के एगो परियोजना से हम जुड़नी ह। अब आर्थिक सहायता आ मन होखला पर ई बा कि के आगे आई आ अपना भाषा में ए छेत्र में कुछ करे के चाही। हमरा समझ से भोजपुरी के कुछ समस्या एकरा मानकीकरण में आवेला। हम हिन्दी में राजेश जी ( ईहें के फ्यूल के कर्ता-धर्ता बानी) के जवन मेल कइले रहनी, ओकरे में से कुछ ईहाँ रख रहल बानी।
रविवार, 11 सितंबर 2011
शनिवार, 27 अगस्त 2011
जन लोकपाल बिल एगो तमाशा त ना ह?
जन लोकपाल बिल का ह? एगो अइसन झुनझुना जवना से लोग हमेसा भुलाइल रहो। सरकार के नीति हमेसा एके साथे दूनो ओरी चले वाला लेखा होला। कुछ ओइसने नीति अन्ना के जन लोकपाल बिलो में बा।
ई बात एगो उदाहरन से साफ हो जाई।
शनिवार, 6 अगस्त 2011
रविवार, 24 जुलाई 2011
शनिवार, 23 जुलाई 2011
एगो प्रयास
बहुत जादे दिन भइल लिखला। हिन्दी में त नियमित लिखात रहेला बाकिर भोजपुरी में ना। ईहे वजह बा कि हमेसा देर हो जाता। बाकिर कुछ दिन का बाद सब ठीक हो जाई आ नियमित लिखे लागेम। अभी कुछ दिन पहिले अँजोरिया पर भोजपुरी जिन्दगी पत्रिका के नाया अंक आ आइल बा। ओकरो के पढ़ के आपन बात कहल जरूरी बा। ऊहो बाकिए बा।
शनिवार, 9 जुलाई 2011
आम आदमी(गजल)
आखिर के बाS इहाँ आम आदमी।
रोज पूछेला ई सुबह शाम आदमी।
आम सय में आ ई चार आना में
बजारे बिकाता सरेआम आदमी।
कुत्तो आदमी कह के गारी देता
खूबे कमइले बाS नाम आदमी।
रविवार, 19 जून 2011
वर्णमाला के गीत (बालगीत)
क से 'कउआ' ख से 'खाना'
ग से बबुआ गइह 'गाना'
घ से 'घोरा' च से 'चप्पल'
छ से 'छाता' ज से 'जंगल'
शनिवार, 18 जून 2011
तू पूछबS कि हम के हईं (लघुकथा)
पान सौ साल पहिले के बात ह। दुआरी पर एगो राही आइल आ केंवारी बजवालस। घर में से हम निकलनी आ पूछनी कि का बात ह? राही कहलस कि तनिसा जगे चाहीं रहे खातिर। हम अपना खाली जमीन में से तनी सा दे देहनी। पूरा धरती आपने नू ह।
बुधवार, 15 जून 2011
हाल भोजपुरी वेबसाइटन के-1
भोजपुरी में आज ले ओतना वेबसाइट ना बन सकली स जतना एह भासा के बोलेवाला लोग बा। देश में लगभग 6-7 करोड़ लोग भोजपुरी बोले वाला बा लेकिन भोजपुरी साइटन के बात जब होखे त हाल नीमन नइखे। 60-70 गो का छव-सात गो(चर्चा लाएक) वेबसाइट भी भोजपुरी में नइखे। तबहूँ कुछ लोग अइसन बा जे भोजपुरी खातिर आपन तन-मन-धन से लागल बा। ओमें एगो बाड़न अँजोरिया के संचालक-संपादक ओमप्रकाश सिंह जी। आज से आठ बरिस पहिले जब भोजपुरी में वेबसाइट के केहू कल्पना ना कइल तब ईहे आदमी भोजपुरी वेबसाइट, ऊहो हमनी के अपना नागरी लिपि में, शुरु कइल। कहीं-कहीं ईहो सुने के मिल जाला कि भोजपुरी में वेबसाइट अँजोरिया के पहिलहूँ रहे बाकिर एतना त तय बा कि नागरी लिपि में ईहे वेबसाइट सबसे पहिले संसार में आइल।
गुरुवार, 9 जून 2011
मंत्रीजी के फरमाइस(हास्य कविता)
शैम्पेन चाहीं टैंकर के टैंकर
ना चाहीं पंखा ना चाहीं कूलर
मंत्रीजी के अपना एसी चाहीं ।
जब बँटाये देस के दौलत
जइहें ऊहवां धउड़त-धउड़त
थोरका ना इनका बेसी चाहीं ।
ना चाहीं पंखा ना चाहीं कूलर
मंत्रीजी के अपना एसी चाहीं ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
